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पंडित चंद्रकांत उपाध्याय गुरुजीत्र्यंबकेश्वर · नाशिक
पंडित चंद्रकांत उपाध्याय गुरुजी, नाशिक और त्र्यंबकेश्वर के पुरोहित

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्

पंडित चंद्रकांत उपाध्याय गुरुजी

नाशिक और त्र्यंबकेश्वर के पुरोहित। घाट पर होने वाली शांति और पितृ विधियाँ, और घर पर होने वाली पूजा आपके ही पते पर। पंद्रह साल से पूजा, जो चलते-चलते हिंदी या मराठी में समझाई जाती है।

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गुरुजी के बारे में

पंडित चंद्रकांत उपाध्याय गुरुजी, नाशिक और त्र्यंबकेश्वर के पुरोहित

पंद्रह साल से नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में पूजा

पंडित चंद्रकांत उपाध्याय गुरुजी पंद्रह साल से नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में वैदिक पूजा कराते आ रहे हैं। विधि में क्या-क्या होता है यह वे दिन से पहले ही परिवार को बता देते हैं, और पूजा के समय हर हिस्सा हिंदी या मराठी में समझाते चलते हैं।

१५
पूजा के वर्ष
१५
की जाने वाली पूजा
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भाषाएँ

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गुरुजी ने तैयार की हुई पूजा की व्यवस्था
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आसान तरीका

पूजा कैसे तय होती है

  1. WhatsApp पर संदेश भेजें

    कौन सी पूजा करानी है और किन तारीखों में आ सकते हैं, यह पंडित जी को बता दें।

  2. मुहूर्त और दक्षिणा जान लें

    वे उपयुक्त दिन, साथ क्या लाना है और दक्षिणा बता देंगे।

  3. पूजा के लिए आइए — त्र्यंबकेश्वर में, या नाशिक में अपने घर पर

    उस दिन पहुँच जाइए, या तय समय पर घर पर रहिए। पूजा परंपरा के अनुसार की जाती है।

आम सवाल

गुरुजी से पूजा कैसे तय करें?

WhatsApp पर संदेश भेज दें — कौन सी पूजा है और आप किन तारीखों में आ सकते हैं। गुरुजी उपयुक्त मुहूर्त, लगने वाला सामान और उस विधि की दक्षिणा बता देते हैं।

दक्षिणा कितनी होगी?

यह विधि पर, वह कितने दिन चलती है और कितने पुरोहित बैठते हैं इस पर निर्भर करता है। इस वेबसाइट पर कोई रकम नहीं छापी गई है — अपनी पूजा और अपनी तारीखों के लिए WhatsApp पर पूछ लें।

कितने पहले संदेश भेजना चाहिए?

एक दिन की ज्यादातर पूजाओं के लिए लगभग एक हफ्ता काफी है। नारायण नागबली, चंडी यज्ञ और लंबे जाप के लिए ज्यादा समय चाहिए, क्योंकि दिन अलग रखने पड़ते हैं और दूसरे पुरोहितों की व्यवस्था करनी पड़ती है।

पूजा किस भाषा में समझाई जाएगी?

हिंदी या मराठी — जिसमें परिवार को सहज लगे। मंत्र संस्कृत में ही बोले जाते हैं, जैसा विधि में कहा गया है।

जो आ नहीं सकते, उनके नाम से पूजा हो सकती है?

कई विधियों में हाँ — उनका पूरा नाम, जन्म का विवरण और गोत्र लेकर, और उनकी जगह परिवार का कोई सदस्य बैठता है। कुछ विधियों में संकल्प के लिए उसी व्यक्ति को बैठना पड़ता है। संदेश भेजते समय अपनी स्थिति बता दें।

क्या आप घर पर भी आते हैं?

हाँ। वास्तु शांति, नवग्रह शांति, रुद्राभिषेक और देवी अनुष्ठान नाशिक और आसपास के गाँवों में घरों, दुकानों और ऑफिसों पर किए जाते हैं। घाट पर होने वाले पितृ कर्म त्र्यंबकेश्वर में होते हैं।

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