
इस पूजा के बारे में
महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का एक मंत्र है, जो भगवान शिव को संबोधित है। अनुष्ठान का अर्थ है उसे तय संख्या में बोलना — आम तौर पर सवा लाख — और साथ-साथ शिवलिंग का अभिषेक।
पद्धति के अनुसार जाप के अंत में दशांश आहुति का हवन होता है, यानी संख्या का दसवाँ हिस्सा। बड़ी संख्या के लिए कई पुरोहित मिलकर जाप करते हैं, जिससे संख्या रखे गए दिनों में पूरी हो जाए।
त्र्यंबकेश्वर में यह ज्योतिर्लिंग के सामने बोला जाता है। नाशिक में हॉल में, या परिवार के अपने घर में जहाँ हवन कुंड की जगह हो।
परिवार यह कब कराते हैं
- जब परिवार का कोई सदस्य अस्वस्थ हो या लंबी बीमारी से गुजर रहा हो।
- श्रावण के सोमवार को, महाशिवरात्रि को, या प्रदोष को।
- जब ज्योतिषी ने पत्रिका देखकर अनुष्ठान करने को कहा हो।
- जन्मदिन या विवाह की वर्षगाँठ पर परिवार के रखे संकल्प के रूप में।
उस दिन
व्यक्ति के नाम और गोत्र से संकल्प, फिर गणेश पूजन और कलश स्थापना।
कही गई संख्या में मंत्र, साथ-साथ शिवलिंग का अभिषेक।
दशांश आहुति का हवन, फिर आरती और प्रसाद।
आने से पहले
क्या लाना है और क्या पहनना है
- जिसके नाम से संकल्प बोलना है उसका नाम, जन्म का विवरण और गोत्र
- जाप की संख्या, अगर परिवार ने पहले से तय कर ली हो
- संकल्प और हवन के लिए बदलने को साफ कपड़े
आम सवाल
पूरे जाप में परिवार को बैठना पड़ता है?
नहीं। परिवार शुरू में संकल्प के लिए बैठता है और अंत में हवन तथा आरती के लिए आता है; बीच का जाप पुरोहित करते हैं।
जो आ नहीं सकते, उनके नाम से हो सकता है?
हाँ। संकल्प उनके नाम से, उनके जन्म के विवरण और गोत्र के साथ बोला जाता है, और उनकी जगह परिवार का कोई सदस्य बैठता है।
- अवधि
- एक से पाँच दिन, संख्या के अनुसार
- मुहूर्त
- तारीखें WhatsApp पर
- दक्षिणा
- WhatsApp पर पूछें
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अपनी जानकारी भेज दें। पंडित जी आपकी तारीख का मुहूर्त और दक्षिणा बताने के लिए फोन कर लेंगे।
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