
इस पूजा के बारे में
नवचंडी दुर्गा सप्तशती के नौ पाठों पर खड़ा देवी अनुष्ठान है, जिसे पुरोहितों का एक समूह अपने सामने स्थापित कलश और देवी के साथ पढ़ता है।
पाठों के बाद दशांश आहुति का हवन होता है, फिर कुमारी पूजन और देवी आरती, और परिवार अक्सर भोजन या दान से समाप्ति करते हैं। कितने पुरोहित बैठेंगे, यह इस पर निर्भर है कि एक दिन में कितने पाठ होने हैं।
इसके लिए हॉल चाहिए, या नाशिक अथवा त्र्यंबकेश्वर में ऐसा घर जहाँ हवन कुंड और पुरोहितों की जगह हो।
परिवार यह कब कराते हैं
- नवरात्रि में, चैत्र या आश्विन में।
- परिवार के संकल्प के दिन रखा गया अनुष्ठान।
- नए घर या नए व्यवसाय की शुरुआत पर, जहाँ परिवार देवी की उपासना करता हो।
उस दिन
संकल्प और गणेश पूजन, फिर कलश स्थापना और देवी स्थापना।
पुरोहितों द्वारा दुर्गा सप्तशती के नौ पाठ।
दशांश आहुति का हवन, कुमारी पूजन, फिर देवी आरती।
आने से पहले
क्या लाना है और क्या पहनना है
- संकल्प बोलने वाले परिवार का नाम और गोत्र
- देवी के लिए लाल कपड़ा, चूड़ियाँ और साड़ी, अगर अपने लाना चाहें
- कितने लोग आएँगे — बैठने की जगह और प्रसाद के लिए
आम सवाल
यज्ञ कहाँ होता है?
हॉल में, या परिवार के घर पर जहाँ हवन कुंड और पुरोहितों की जगह हो — नाशिक में या त्र्यंबकेश्वर में। जगह मिलकर तय की जाती है।
यह शतचंडी से कैसे अलग है?
नवचंडी में सप्तशती के नौ पाठ होते हैं और शतचंडी में सौ, इसलिए शतचंडी के लिए ज्यादा पुरोहित और ज्यादा दिन चाहिए।
- अवधि
- एक से दो दिन
- मुहूर्त
- तारीखें WhatsApp पर
- दक्षिणा
- WhatsApp पर पूछें
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अपनी जानकारी भेज दें। पंडित जी आपकी तारीख का मुहूर्त और दक्षिणा बताने के लिए फोन कर लेंगे।
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