
इस पूजा के बारे में
कुंभ विवाह शादी के रूप में होता है, जिसमें जीवनसाथी की जगह कुंभ — या विष्णु अथवा अश्वत्थ की प्रतिमा — रखी जाती है। मंडप लगाया जाता है और शादी की तरह मंगलाष्टक बोले जाते हैं।
यह विधि वहाँ रखी जाती है जहाँ पत्रिका मांगलिक पढ़ी जाती है और परिवार चाहता है कि पहला विवाह इसी रूप में हो। तीनों रूपों में से कौन सा लिया जाए, यह जन्म का विवरण देखने के बाद तय होता है।
यह त्र्यंबकेश्वर में होती है, या नाशिक में परिवार के अपने घर पर जहाँ मंडप की जगह हो।
परिवार यह कब कराते हैं
- जहाँ शादी तय होने से पहले ज्योतिषी ने पत्रिका में मांगलिक योग पढ़ा हो।
- शादी के दिन से कुछ हफ्ते पहले, पुरोहित के साथ चुनी गई तारीख पर।
उस दिन
संकल्प और गणेश पूजन, फिर मंडप प्रतिष्ठा।
कुंभ का, या विष्णु अथवा अश्वत्थ प्रतिमा का पूजन।
मंगलाष्टक के साथ विवाह विधि, फिर अंत में हवन और आरती।
आने से पहले
क्या लाना है और क्या पहनना है
- विधि के लिए बैठने वाले व्यक्ति का जन्म विवरण
- नई साड़ी या धोती, जैसी शादी में पहनी जाती है
- हल्दी, कुंकू और फूल, अगर परिवार अपने लाना चाहे
आम सवाल
इस विधि के लिए कौन बैठता है?
जिसकी पत्रिका में यह योग है वही व्यक्ति, और परिवार साथ में उपस्थित। विधि का कौन सा रूप रखा जाए, यह जन्म का विवरण देखने के बाद तय होता है।
शादी से कितने पहले यह की जाती है?
परिवार आम तौर पर शादी से कुछ हफ्ते पहले इसकी व्यवस्था करते हैं। उपयुक्त तारीख मिलकर चुनी जाती है।
- अवधि
- एक दिन, लगभग ३ घंटे
- मुहूर्त
- तारीखें WhatsApp पर
- दक्षिणा
- WhatsApp पर पूछें
कॉल बैक के लिए कहें
अपनी जानकारी भेज दें। पंडित जी आपकी तारीख का मुहूर्त और दक्षिणा बताने के लिए फोन कर लेंगे।
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